दिराजी की अंतिम इच्छा बूंदबूद से देश की रक्षा 

पोता टुकडे गॅंग का साथी वोटों की मांगे भिक्षा 

यासीन मलिक का स्वागत हिरो है उमर खलिद 

बहते नही आसू जब आतंक से होता कोई शहीद 

ढुंढते स्वार्थ की संधी जहां दिखता दुःख दर्द 

सेरोस से ले आते है अराजकता की दीक्षा 

पोता टुकडे गॅंग का साथी वोटों की मांगे भिक्षा

राममंदिर निर्माण का हो जश्न तब होता इन्हे खेद 

राम और शिव मे भी खोजे अंतर दिखे इन्हे भेद

जुडता जिससे है भारत उस सनातन से है नफरत 

टुकडों से बना भारत सोच बदलना इन्हे नक्शा 

पोता टुकडे गॅंग का साथी मांगे वोटों की भिक्षा

स्मित मचर जैसे वैमानिक सीमापर लडते सैनिक 

खिलाडियों को सुवर्णपदक, राज करते वैज्ञानिक 

महसूस ना होता गर्व इन्हे भारत लगे काल्पनिक 

संस्था पर आघात छोडो इनका साथ न करो प्रतीक्षा

पोता टुकडे गॅंग का साथी मांगे वोटों की भिक्षा

यावर आपले मत नोंदवा

नमस्कार,

 माझ्या ब्लॉगला भेट दिल्याबद्दल धन्यवाद. आपल्या भोवती घडणाऱ्या घटनातून, अनुभवातून आपल्या सर्वांच्या मनात अनेक पडसाद, भावना उमटतात. त्या फक्त शब्दबद्ध करणे हा अल्पसा प्रयत्न आहे.  या प्रवासात आपण सहप्रवासी आहात याचा आनंद आहे. आपण आपली प्रतिक्रिया ब्लॉगवर जरूर नोंदवा.

नवविवाहित दांपत्याच्या स्वप्नांना अलगद उलगडत संसार सजवणारा दहा कवितांचा संग्रह आहे …. सुखचित्र नवे

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