
दिराजी की अंतिम इच्छा बूंदबूद से देश की रक्षा
पोता टुकडे गॅंग का साथी वोटों की मांगे भिक्षा
यासीन मलिक का स्वागत हिरो है उमर खलिद
बहते नही आसू जब आतंक से होता कोई शहीद
ढुंढते स्वार्थ की संधी जहां दिखता दुःख दर्द
सेरोस से ले आते है अराजकता की दीक्षा
पोता टुकडे गॅंग का साथी वोटों की मांगे भिक्षा
राममंदिर निर्माण का हो जश्न तब होता इन्हे खेद
राम और शिव मे भी खोजे अंतर दिखे इन्हे भेद
जुडता जिससे है भारत उस सनातन से है नफरत
टुकडों से बना भारत सोच बदलना इन्हे नक्शा
पोता टुकडे गॅंग का साथी मांगे वोटों की भिक्षा
स्मित मचर जैसे वैमानिक सीमापर लडते सैनिक
खिलाडियों को सुवर्णपदक, राज करते वैज्ञानिक
महसूस ना होता गर्व इन्हे भारत लगे काल्पनिक
संस्था पर आघात छोडो इनका साथ न करो प्रतीक्षा
पोता टुकडे गॅंग का साथी मांगे वोटों की भिक्षा
यावर आपले मत नोंदवा