दशहरे की पूजा
ओम देवेंद्राय नमः
ओम आदित्याय नमः
ओम नारायणाय नमः
ओम सितारामाय नमः
ओम नरेंद्राय नमः
ओम मोहनाय नमः
कमल पुष्पम समरपयामि सर्वेभौ परिवारभ्यौ नम: ( शुद्ध गंगाजल आचमन अपेक्षित है )

आपके सारे पाप का क्षालन होगा

जप करते समय ध्यान रखिये ‘

आपकी आखे बंद हो
ह्रदय की गती मंद हो
हात अपने रिक्त हो
पचपन इंच सीना होने तक ही श्वसन दीर्घ हो

अब अपने अंदर झांक के देखिये :

बाहरी घटनाओं से आप व्यथित नही होंगे, संपत्ती का मोह दूर हो जायेगा

प्रकाश ही प्रकाश दिखेगा स्म्रुति लौट आयोगी

आपकी मुद्रा (बँक में ) शांत हो जायेगी

अखिल ब्रम्हांड भगवा होने की अनुभूति होगी

इस ब्रह्मांड मे आप एक सूक्ष्म जीव है आपकी चिंताए अतिसूक्ष्म है ऐसा साक्षात्कार होगा

आपका तन मन धन हलका हो जायेगा
नारायण सत्य होगा
विरोधियों का मन परिवर्तन होगा

दशहरे की पूजा सफल संपूर्ण भागवत पुराण समाप्त

 

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नमस्कार,

 माझ्या ब्लॉगला भेट दिल्याबद्दल धन्यवाद. आपल्या भोवती घडणाऱ्या घटनातून, अनुभवातून आपल्या सर्वांच्या मनात अनेक पडसाद, भावना उमटतात. त्या फक्त शब्दबद्ध करणे हा अल्पसा प्रयत्न आहे.  या प्रवासात आपण सहप्रवासी आहात याचा आनंद आहे. आपण आपली प्रतिक्रिया ब्लॉगवर जरूर नोंदवा.

नवविवाहित दांपत्याच्या स्वप्नांना अलगद उलगडत संसार सजवणारा दहा कवितांचा संग्रह आहे …. सुखचित्र नवे

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