दशहरे की पूजा

ओम देवेंद्राय नमः
ओम आदित्य नाथाय नमः
ओम एकनाथाय नमः
ओम सितारामाय नमः
ओम नरेंद्राय नमः
ओम मोहनाय नमः
कमल पुष्पम समरपयामि सर्वेभौ परिवारभ्यौ नम: ( शुद्ध गंगाजल आचमन अपेक्षित है )
आपके सारे पाप का क्षालन होगा
जप करते समय ध्यान रखिये ‘
दीपक नही चिराग रखना है
अब आपकी आखे बंद हो
ह्रदय की गती मंद हो
हात अपने रिक्त हो
पचपन इंच सीना होने तक ही श्वसन दीर्घ हो
अब अपने अंदर झांक के देखिये :
बाहरी घटनाओं से आप व्यथित नही होंगे,
संपत्ती का मोह दूर हो जायेगा
जगत्प्रकाश दिखेगा
स्म्रुति लौट आएगी
आपकी मुद्रा (बँक में ) शांत हो जायेगी
अखिल ब्रम्हांड भगवा होने की अनुभूति होगी
इस ब्रह्मांड मे आप एक सूक्ष्म जीव है
आपकी चिंताए अतिसूक्ष्म है ऐसा साक्षात्कार होगा
आपका तन मन धन हलका हो जायेगा
नारायण सत्य होगा
राहू केतू अनिष्ट प्रभाव दूर होगा
विरोधियों का मन परिवर्तन होगा
जय शंकर, जय गजेंद्र, जय भूपेंद्र
शुभेंदू भवतु
दशहरे की पूजा सफल संपूर्ण भागवत पुराण समाप्त:-