पट्टी बांध आखों पर सुनाती कहानी गांधारी
न सुन पाती है चीख न दिखती है चिंगारी
बच्चे पोते जब हो रहे थे बेहोश
स्वैराचार में डुबा जवानी का जोश
तब कहा था आप का आक्रोश
कहती छेद ना करो थाली मेरी प्यारी
मरे कोई स्ट्रगलर या हो नारी का बाजार
एहसान करते गरिबों देते हम रोजगार
कैसा है यह जय या कोई अहंकार
गिरती सोच दिखता न कोई अत्याचारी
प्रतिदिन होता है यहा वस्त्रहरण
मौन धारण करते भीष्म करण
चेहरा असली दिखाता है दर्पण
शोषण नारी का करती दुसरी नारी
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