पुरुषोत्तम कहां है

प्रभू रामचंद्र तो बस गये पर मर्यादा कहां है
हर जगह जुटी जो भीड पर पुरुषोत्तम कहां है
चंदे की होती है चोरी तो सत्य वचन कहां है
चोरी पर राजनीति भारी भक्ती वंदन कहां है
कैकयी मंथरा का हट भरत वचन कहां है
असुरशक्ती का करे विनाश वह हवन कहां है
हर जगह जो भीड पुरुषोत्तम कहां है
मायावी राक्षस बनते कांचनमृग जटायु कहां है
प्रतिदिन रावण करता हरण लक्ष्मणरेखा कहां है
सीता से छलकपट शब्दों से होता है अपमान
प्रभू मुद्रिका ले जाये हाथ ऐसा हनुमान कहां है
हर जगह जूट गई भीड पर पुरुषोत्तम कहां है…
बिना सोच हाथो मे लिये है उग्र जो पत्थर
उसी पत्थर पर लिखो श्री राम के दो अक्षर
होगा चमत्कार पत्थर से पत्थर जुडकर
बनेगा रामसेतू साथ देगा अथांग सागर
जानकी तो मुक्त होगी पर हृदय में राम कहां है
प्रभू राम तो बस गये पर मर्यादा कहां है
हर जगह जूट गई भीड पर पुरुषोत्तम कहां है