This poem is dedicated to news anchors who have sold out their conscious. Written in Hindi. On the lines of famous poem ‘Koshish Karnewalon ki kabhi Haar Nahi Hoti’
लहरे पैदा करकरके टीआरपी क्रास नही होती
टीव्ही पर चर्चा करनेवालों की कभी जीत नही होती ।
बङे अंकर जब माईक लेकर घरघर जाते है
फिसलते है, सोशल मीडिया पे रौंदे जाते है
फिर भी कोयला उगलते रहते है
ना समझे की कर्म बिना प्रगति नही होती
टीव्ही पर चर्चा करनेवालो की कभी जीत नही होती ॥
मात्रुभूमी का वंदन हो वा सरस्वती का स्तवन हो
गोमाता का पूजन हो या वीरों का अभिनंदन हो
सहज प्रेरणा से ही ह्रुदय का स्पंदन हो
संवेदनाओं से बुद्धि बडी नही होती
टीव्ही पर चर्चा करनेवालो की कभी जीत नही होती ॥
क्रुतज्ञता का भाव न हो, उससे गाय पे चर्चा नही होती
खोया है जिसने विश्वास , उसकी राय पे चर्चा नही होती
जमीर जिसने बेच दिया, उससे न्याय पर चर्चा नही होती
नही बेची जिसने चाय, उससे चाय पे चर्चा नही होती
यूही बेकार बात किसके हित मे नही होती
टीव्ही पर चर्चा करनेवालो की कभी जीत नही होती
यावर आपले मत नोंदवा